बदलाव के साथ स्वयं को समायोजित करने का गुण हर परिस्थिति में कारगर

भारतीय मूल का व्यक्ति विश्व में कहीं भी, किसी भी देश में हो–एक अलग पहचान रखता है| भारतीय सभ्यता, संस्कृति की झलक व्यक्तित्व को एक अलग आभा प्रदान कर एक विशिष्ट पहचान देती है| उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम, दिशाएँ महत्त्व नहीं रखती, महत्त्व होता है जड़ों का| भारत की मिट्टी से जुड़ाव, फिर वह जुड़ाव चाहे कितने ही वर्षों पुराना हो| जैसे एक परिवार के विभिन्न लोग अपना वैशिष्ट्य बनाये हुए भी एक-दूसरे से मिलते-जुलते-से लगते हैं वैसे ही विश्व के किसी कोने में रहने वाला भारतीय मूल का व्यक्ति एक विशेष…

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संपादकीय

समस्या कोई ऐसी नहीं जिसका समाधान न हो लेकिन मनुष्य का चंचल मन जल्दी छुटकारा पाना के लिए कभी-कभी ऐसी गलतियाँ कर बैठता है जिससे वो समस्या में उलझता ही जाता है | समस्या आने पर सबसे पहला कार्य तो यह है कि खूब अच्छे से शांत मन से उस पर विचार करें कि यह क्यों आया और इसके संभव समाधान क्या हो सकते हैं फिर अपने सामर्थ्य ,बुद्धि और विवेक से इसके समाधान पर कार्य प्रारम्भ करना चाहिए | मन को शांत रख कर जीवन में ख़ुशी प्राप्त करने…

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संपादकीय

आगे बढ़ना चाहिए | कुछ की मनुष्य होंगे जिसकी सारी मनोकामना पूरी होती हो,जिसके सारे कार्य सिद्ध होते हो ,जिसका हर उद्देश्य पूरा होता हो | इसलिए संतोष सबसे जरुरी है | कुछ लोग असफलता को बर्दाश्त नहीं पाते वो सच्चे मायने में जीवन की सार्थकता को समझ नहीं पाते हैं | सफलता और असफलता आगे पीछे चलते हैं | दोनों का समावेश संभव है इसे स्वीकार करना ही जीत का मूल मन्त्र है | असफलता आपको और मजबूत करने के लिए होती है ,आपको अपनी गलतियों को समझने का…

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संपादकीय – हिंदी की गूँज

धीरे-धीरे संभलने का वक्त आया है धीरे-धीरे सुधरने का वक्त आया है पिछले दो वर्षों में बहुत कुछ बदल गया | हम बदल गए ,हमारे सोचने का नजरिया बदल गया | पूरी दुनिया में एक भूचाल सा आ गया जिसके कारण कई लोग टूटे ,कई लोग बिखरे ,कई लोग बदले ,कई लोग सँवरे,कई लोग सुधरे और जो नहीं सुधरे वो मरे | कोरोना वायरस जब से आया तब से दुनिया में लोगों ने अपनी पहली चर्चा में इसे ही रखा | दूसरी कोई भी चर्चा प्राथमिकता में पीछे ही रही |  न केवल…

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सम्पादकीय

एक सामान्य मनुष्य के लिए जीवन में केवल भौतिक सुख की प्राप्ति ही सम्पूर्ण हैं जबकि असाधारण व्यक्तित्व के भौतिक सुख बहुत मायने नहीं रखता है | वो स्वयं को संतुष्ट और संतुलित रखने का प्रयास करते हैं | जीवन के हर चरण में और प्राप्ति के हर स्तर पर वो अपने आप को संतुष्ट रखने है | वास्तव में यही आत्मा को संतुष्ट रखने का सबसे बड़ा मन्त्र है | भौतिक सुख की कामना करने वाले व्यक्ति महसूस करते होंगे की उनके जीवन में संतुष्टि नहीं आ पाती क्योंकि…

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नया वर्ष और हम

नया वर्ष नयी उम्मीदों को लेकर आया है। वो सारी उम्मीदें जो 2020 में डगमगायी थी उन्हें अब रास्ता मिलने की सम्भावना है। उम्मीदों और विचारों का बड़ा गहरा सम्बन्ध है। सकारात्मक विचार ,उम्मीदों को और मजबूत बनाते हैं और सकारात्मक विचार आत्मा की शुद्धता से मस्तिष्क में प्रवाहित होते हैं। यही हमें दृढ़ बनाते हैं।  पिछले वर्ष तमाम आशंकाओं के बीच भी हिंदी और साहित्य के प्रवाह में कमी नहीं आयी।  हमने साहित्य और तकनीकी का समन्वय देखा ,हमने कविता और सोशल मीडिया का समन्वय देखा। प्रवासी साहित्यकारों और भारतीय रचनाकारों का मिलाजुला जबरदस्त प्रयास देखा…

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अपनी बात

इस वर्ष भी हिंदी दिवस बीत गया | हर वर्ष हिंदी दिवस आता है ,हिंदी के लोग पखवाड़े में जागरूक होते हैं। राजभाषा अधिकारियों की सक्रियता देखने लायक होती है। सरकारी संस्थानों में हिंदी के नाम पर कवि सम्मलेन, काव्य-गोष्ठी, काव्य-प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता इत्यादि का आयोजन किया जाता है।  उत्सव में उल्लास भी दिखाई देता है और कहीं-कहीं मज़बूरी भी।  मज़बूरी का मै कतई समर्थन नहीं करती लेकिन ये एक दिन का उल्लास भी मुझे खटकता है। मैं उल्लास के पक्ष में तो हूँ लेकिन एक दिन के इस उल्लास से हिंदी का कितना भला हो सकता है?…

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संपादकीय

आज सारी दुनिया में कोलाहल मचा है | एक वायरस ने सभी को यह सोचने पर विवश कर दिया है कि जीवन का सुख क्या है ? पैसा कमाने और जुटाने की जद्दोजहद में भाग रहे आदमी को अब समझ में आ रहा है कि जीवन की आवश्यकताएँ कितनी सीमित हैं | भीड़ का चेहरा बने हुए सेलेब्रेटी को आज भीड़ से ही डर लग रहा है | यह कोई वायरस हो या  कोई जैविक हथियार हो या किसी तरह की प्राकृतिक आपदा | एक बात तय है इस वायरस में…

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