समस्या कोई ऐसी नहीं जिसका समाधान न हो लेकिन मनुष्य का चंचल मन जल्दी छुटकारा पाना के लिए कभी-कभी ऐसी गलतियाँ कर बैठता है जिससे वो समस्या में उलझता ही जाता है | समस्या आने पर सबसे पहला कार्य तो यह है कि खूब अच्छे से शांत मन से उस पर विचार करें कि यह क्यों आया और इसके संभव समाधान क्या हो सकते हैं फिर अपने सामर्थ्य ,बुद्धि और विवेक से इसके समाधान पर कार्य प्रारम्भ करना चाहिए | मन को शांत रख कर जीवन में ख़ुशी प्राप्त करने के उपाय को कई लोगों ने बताया जिसमें एक नाम सिख धर्म के प्रथम गुरु गुरुनानक जी का भी है | गुरु नानक जी की वाणी भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से ओत−प्रोत है। उन्होंने अपने अनुयायियों को जीवन की दस शिक्षाएँ दीं यदि उन्हें अपने जीवन में उतार लिया जाए तो जीवन सचमुच धन्य हो जाता है।गुरुनानक जी ने हमेशा जीवों पर दया और आप में सद्भाव -भाईचारा रखने के लिए प्रेरित किया ,उन्होंने बताया कि इस संसार में इंसान को इंसान से प्रेम भाव रखना चाहिए , नफरत की कहीं की जगह न हो | आज के समय में गुरु नानक जी की शिक्षाएं , बहुत प्रासंगिक और आवश्यक हैं | आज हम स्वार्थ ,लोभ में जनसेवा भूल रहे हैं ,ऐसे में सिख धर्म के अनुयायियों का अनुसरण करके हम बहुत कुछ सिख सकते हैं | क्योंकि आज के जो हालत हैं उसको सुधारने के लिए मानवता का प्रचार-प्रसार अति आवश्यक है | गुरु पर्व आने वाला है ,महान संत को स्मरण करते हुए अपने पाठकों से यहीं कहना चाहूँगा कि प्रेम सबको एक करता है और नफरत सबको बाँटता है इसलिए ज्यादा से ज्यादा प्रेम का प्रसार करें ,इससे मनुष्य का जीवन , परिवार ,समाज और देश सब जगह सकारात्मक परिवर्तन दिखेंगे |
युग प्रवर्तक,मार्गदर्शक ,कवि ,सुधारक ,संत थे
भाईचारे के समर्थक , सहृदय सरदार थे
प्रेम की आराधना को श्रेष्ठ कहते ही रहे
श्री गुरु जी ज्ञान के और बुद्धि के भंडार थे
एक है ईश्वर सभी के नाम बस केवल अलग है
हर जगह रहते प्रभु जी और उन्हीं का सारा जग है
जो बताया है उन्होंने वो बहुत अनमोल है
वो दया के ,आसरा के ,सच के पैरोकार थे
हक़ किसी का छीन लेना है गलत कहते रहे वो
नेक दिल को कष्ट देना है गलत कहते रहे वो
अंधविश्वासों को हरदम ही गलत कहते रहें
प्रेरणा के श्रोत थे वो , लक्ष्य के आधार थे
बात उनकी मानता जो वो सुखी इंसान है
दर्द सबका कम करे जो वो बड़ा धनवान है
गुरु नानक देव जी ने ज्ञान बाँटे ज्ञानियों को
आम जन के बीच उनके सर्वप्रिय व्यवहार थे
दान और उपकार से बढ़कर नहीं कुछ भी यहाँ
दुःख वहाँ निश्चित मिलेगा, मोह ,लालच है जहाँ
सीख उनकी नेक है जो सीख पाया बन गया
बन गए सरकार वो जो कल तलाक बेकार थे
वो अकेले ही चले थे आज पीछे कारवाँ
आज भी गुरु हैं वहाँ गुरु ग्रन्थ साहिब है जहाँ
आओ हम सजदा उस सद्गुरु ,परमेश का
थे नहीं सामान्य जन वो अलौकिक अवतार थे
- विनोद पांडेय