राकेश छोकर की कवितायें

फिर से राजतिलक कर दो

 

अखंड भारत  के वीर सपूतों

शौर्य गाथाओं के शिल्पकारों

अश्व मेध के बुंदेलों

युद्धाभिषेक करो

तिरंगे को प्रणाम कर

मृत्युन्जय  आवेग का कर वरण

प्रतिकार की क्रोधाग्नि से

शत्रुओं के अत्याचार पर

अभिमन्यु सा वार कर

वज्रघाती पैगाम दो

राष्ट्र के हो अभिमान  तुम

अर्जुन सरीखे  रणबांकुर

भीष्म प्रतिज्ञा लो

माँ के यशोगान को

प्राणों के अभिदान से

किस्से क्रान्ति के

फिर से गुंजायेमान करो

मत अब अभयदान दो

अनुपम शौर्य गाथा तुम्हारी

चंदन तिलक सा मान धरो

तुम्हारे रक्त का कण कण

समर्पित

राष्ट्र को प्रतिक्षण

कर्मण्य अधिकार्रष्य का वचन

दे गए गीता के कृष्ण

अब हर पापी का विध्वंस कर दो

अपने इतिहास को

फिर से राजतिलक कर दो

फिर से राजतिलक कर दो।

 

  1. उमंग….

क्षणिक मनोवेग

आनंद का उल्लास

औऱ ऊर्जा का अविरल प्रवाह

जंग की जीत का श्रेय

विजय श्री का पोषण

सहिष्णुता के सम्बन्ध सेतु की

अस्तित्वशीलता

वैभव,शौर्य, सुयश

श्री वृद्धि संग

उमंग

निर्मल नीर गंगा सी तरंग

तुम ही हो

मेरे राष्ट्र की नींव

इतिहास, वर्तमान और भविष्य

औऱ

मेरे ग्रन्थों के अक्षर

तम से हटकर

हुए जो आत्मविभोर

ऋतुराज संग

नाचे मोर

खोल पंख

प्रकृति की उजले भोर

अंतर जगे जब उमंग

अंतर जगे जब उमंग।

 

  • राकेश छोकर

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