हाथ में लेकर कटोरा,मांगता वह भीख है।
भूख से लाचार दिखता,दे रहा कुछ सीख है।।
कह रहा कुछ भी कहाँ वह,बस रहा वह चीख है।
बस उदर की तृप्ति खातिर,कर रहा वह कीक है।।
फट गये परिधान उसके,गंदगी की छींट है।
उठ रही दुर्गन्ध तन से,पर जमा वह ढीठ है ।।
रंग काला हो गया है, आँख उसकी पीत है।
देह में हड्डी बची बस,पेट में ही पीठ है।।
रोटियों की याचना में ,डालता वह दीठ है।
गर न मिलती रोटियाँ है, वह सुनाता झीख है।।
नहीं चहिए राजगद्दी,ना बनानी पीठ है।
पेट भरने के लिए ही,बन गया वह नीच है।।
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नाम-: अमिताभ पाण्डेय
पिता-: स्व.नित्यानन्द पाण्डेय
माता-: स्व. द्रौपदी पाण्डेय
सम्प्रति-: कार्यालय अधीक्षक
सर्वोदय किसान पीजी कालेज
कौड़ीराम गोरखपुर ।
संवाददाता हिन्दी दैनिक “आज ”
अध्यक्ष, हिन्दी साहित्य भारती, महानगर-गोरखपुर, उत्तर प्रदेश