हाथ में लेकर कटोरा,मांगता वह भीख है। भूख से लाचार दिखता,दे रहा कुछ सीख है।। कह रहा कुछ भी कहाँ वह,बस रहा वह चीख है। बस उदर की तृप्ति खातिर,कर रहा वह कीक है।। फट गये परिधान उसके,गंदगी की छींट है। उठ रही दुर्गन्ध तन से,पर जमा वह ढीठ है ।। रंग काला हो गया है, आँख उसकी पीत है। देह में हड्डी बची बस,पेट में ही पीठ है।। रोटियों की याचना में ,डालता वह दीठ है। गर न मिलती रोटियाँ है, वह सुनाता झीख है।। नहीं चहिए…
Read MoreTag: अमिताभ पाण्डेय
गजल
आप का ऩजरें झुकाना आज हमको याद है। चंद पल का मुस्कुराना आज हमको याद है ।। देख कर भी कुछ न कहना देखते रहना सदा। बिन कहे सब कुछ जतानाआज हमको याद है ।। धूप में छत पर टहलना देखना घर को मेरे। बेव़जह खिड़की पे’आनाआज हमको याद है ।। ख़त बनाकर भेजने की कोशिशें बेकार थी। दूर से ख़त को दिखाना आज हमको याद है ।। राह जाते देख कर के दूर जाते थे कभी। पास आने का बहाना आज हमको याद है ।। रात में करवट बदलना…
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