चंदा की चांदनी

बहुत लंबी रात है ,चाँद भी कुछ हमारे साथ है

बैठे है उनके  आगोश में , न जाने कब उनसे मुलाकात हो ।

गुलज़ार सा हो गया अम्बर आज ,

कहि नूर न चुरा ले ये जनाब , बैठे है इंतज़ार में,

इस बादल की छाव में,  तारे सिमट के आ गए ,

आज सारे इस संसार मैं ।

क्यों न इतराउ मे , क्यों न शर्माउ में,

खुबसुरती की इस चादर में ,क्यों न गुम हो जाओ में ।

दाग है तुझमे फिर भी ,नाप न पाया तेरी खूबसूरती कोई

बस यूं ही तारीफ़ मेरी भी करे कोई 😜

सुंदरता का प्रतीक तुम को है माना ,

आज कुछ अफसाना बना के ही जाना ।

कल का पता नही तुम यू रिज़ा ओ गे ,

अफसोस न रह जाए कह़ी , क्या पता छुप जाओगे ।

आज जी भर के अरमान निकलने दो ,

चांदनी की खूबसूरती में पिघलने दो , प्यार से प्यारा है  कोई ये बात आज पता चलने दो ।

इस लंबी रात का जिक्र है निराला ,

खूबसूरती की इस चादर ने ग़जब कर डाला ।

 

मेघा सक्सेना

 

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