चंदा की चांदनी

बहुत लंबी रात है ,चाँद भी कुछ हमारे साथ है बैठे है उनके  आगोश में , न जाने कब उनसे मुलाकात हो । गुलज़ार सा हो गया अम्बर आज , कहि नूर न चुरा ले ये जनाब , बैठे है इंतज़ार में, इस बादल की छाव में,  तारे सिमट के आ गए , आज सारे इस संसार मैं । क्यों न इतराउ मे , क्यों न शर्माउ में, खुबसुरती की इस चादर में ,क्यों न गुम हो जाओ में । दाग है तुझमे फिर भी ,नाप न पाया तेरी खूबसूरती…

Read More