राकेश छोकर की कवितायें

फिर से राजतिलक कर दो   अखंड भारत  के वीर सपूतों शौर्य गाथाओं के शिल्पकारों अश्व मेध के बुंदेलों युद्धाभिषेक करो तिरंगे को प्रणाम कर मृत्युन्जय  आवेग का कर वरण प्रतिकार की क्रोधाग्नि से शत्रुओं के अत्याचार पर अभिमन्यु सा वार कर वज्रघाती पैगाम दो राष्ट्र के हो अभिमान  तुम अर्जुन सरीखे  रणबांकुर भीष्म प्रतिज्ञा लो माँ के यशोगान को प्राणों के अभिदान से किस्से क्रान्ति के फिर से गुंजायेमान करो मत अब अभयदान दो अनुपम शौर्य गाथा तुम्हारी चंदन तिलक सा मान धरो तुम्हारे रक्त का कण कण समर्पित…

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संपादकीय

आज सारी दुनिया में कोलाहल मचा है | एक वायरस ने सभी को यह सोचने पर विवश कर दिया है कि जीवन का सुख क्या है ? पैसा कमाने और जुटाने की जद्दोजहद में भाग रहे आदमी को अब समझ में आ रहा है कि जीवन की आवश्यकताएँ कितनी सीमित हैं | भीड़ का चेहरा बने हुए सेलेब्रेटी को आज भीड़ से ही डर लग रहा है | यह कोई वायरस हो या  कोई जैविक हथियार हो या किसी तरह की प्राकृतिक आपदा | एक बात तय है इस वायरस में…

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