साहित्य और समाज मानव जीवन के ऐसे दो कड़ी हैं जो हर स्थिति और परिस्थिति में मानव मूल्यों की रक्षा करने, जनकल्याण कार्यों को दिशा देने,विश्व को सही राह दिखाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।ये अभी से नहीं सदियों से चला आ रहा है। जब जब मानव मूल्यों में गिरावट, सृष्टि के जीवों में संकट और नकारात्मक विचारों वाले लोग हावी होने के प्रयास किये,या स्वार्थी लोगों के कुत्सित प्रयास हुए हैं, साहित्य और समाज उठ खड़ा हुआ है।अपने जिम्मेदारियों का इन दोनों कड़ियों ने पूरी ईमानदारी से निर्वहन किया है।साहित्य…
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