1 गुमसुम लम्हें सन्नाटे गहरे जाएं तो जाएं कहाँ उस पर बैठे यादों के पहरे जाएं तो जाएं कहाँ है बहुत मासूम ये दिल, धड़के भी रह रह कर घूरते अनजाने चेहरे , जाएं तो जाएं कहाँ हैं बहुत ही दूर मुझसे ,अब लफ़्ज़ों के दायरे मायने समंदर से गहरे जाएं तो जाएं कहाँ है यहाँ कुछ भी नही बस खामोशी के सिवा रूठे रूठे,कुछ लम्हे ठहरे जाएं तो जाएं कहाँ करते है पीछा अल्फ़ाज़ मेरे बनके गहरे साये दुश्मन खुद अल्फ़ाज़ मेरे जाएं तो जाएं…
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